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*साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान भाजपा के लिए बने सिर दर्द: भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा तिलमिलाएं, सांसद राकेश सिन्हा ने सोच कर बोलने की दी नसीहत*

*साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान भाजपा के लिए बने सिर दर्द: भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा तिलमिलाएं, सांसद राकेश सिन्हा ने सोच कर बोलने की दी नसीहत*
रिपोर्ट – परितोष सूर्यवंशी संवाददाता
भोपाल। भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के लगातार बयानों से भाजपा में चिंता बढ़ गई है। भोपाल सीट पर उनके ऐलान के साथ ही विवाद जुड़ गए हैं। उन्होंने पहले एटीएस चीफ शहीद हेमंत करकरे के बारे में विवादित बयान दिया जिससे देश भर में पार्टी की किरकिरी हुई। अब उन्होंने बाबारी मस्जिद पर बयान देकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जो सीट संघ का गढ़ कही जाती हैं l वह भाजपा के हाथ से निकलती दिख रही है। और इसका बड़ा कारण बन रहे हैं प्रज्ञा के बयान। भाजपा नेताओं की समझाइश के बाद भी वह अपने बयानों पर लगाम लगाने में नाकाम हो रही हैं। दरअसल, साध्वी प्रज्ञा के बयान से मराठी समाज में नाराजगी है। इससे उनका बड़ा धड़ा पार्टी के फैसले से खफा बताया जा रहा है। हेमंत करकरे के बारे में दिए गए उनके बयान से प्रदेश की अन्य सीटों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। मराठी समाज को उनके बयान से गहरा सदमा पहुंचा है। बयानबाजी से बिगड़ते हालात देखते हुए भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा तिलमिलाएं है, उन्होंने मोर्चा संभाते हुए प्रज्ञा को बयान देने से पहले समधाइश भी दी है। उन्होंने प्रज्ञा को नसीहत देते हुए कहा है कि वह संवेदनशील मामले राजनीति में शामिल न करें। राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा ने भी प्रज्ञा से मुलाकात कर उन्हें गंभीरते के साथ सोच समझ कर बोलने की हिदायत दी है। उधर पार्टी में मंथन शुरू हो गया हैं l जिस तरह से प्रज्ञा के बयानों ने देश भर में सनसनी मचाई है उससे भाजपा हिल गई है। पार्टी को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने मोर्चा संभालते हुए डैमेज कंट्रोल करने में जुट गए हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ नेताओं ने तो उनके बदले जाने पर भी विचार करने के लिए पार्टी को सलाह दी है। बदी जुबान में नेताओं में इस बात का डर है कि प्रज्ञा के बयानों से उनकी छवि भी खराब हो सकती है। जिसका हरजाना उन्हें भी बाद में भुगतना पड़ सकता है। संघ ने भोपाल सीट जिताने की जिम्मेदारी ली है। लेकिन प्रज्ञा के बयान से भाजपा ने खुद को अलग कर लिया हैं l वहीं उन्हें नामांकन से पहले दो नोटिस भी चुनाव आयोग की ओर से भेजे जा चुके हैं। दिग्गी को काउंटर करने के लिए भाजपा ने हिंदुत्व का मुद्दा उठाने की रणनीति बनाई थी। लेकिन अब यह मामला उसपर ही भारी पड़ती दिखाई दे रहा है।